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मध्य प्रदेश की युवा नीति

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मध्य प्रदेश की युवा नीति
स्वामी विवेकानंद ने कहा है पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता और एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान।' ध्यान के द्वारा ही हम इंद्रियों पर संयम रख सकते हैं। शम, दम और तितिक्षा अर्थात मन को रोकना, इन्द्रियों को रोकने का बल, कष्ट सहने की शक्ति और चित्त की शुद्धि तथा एकाग्रता को बनाए रखने में ध्यान बहुत सहायक होता है स्वामी विवेकानंद का यह कथन युवको के लिए सटीक बैठता है. आज का युवक मन, इन्द्रिय को रोकने,बल,कष्ट सहन करने की शक्ति को खो चूका है, संघर्ष करने की ताकत नहीं के बराबर है, सभवतः इसी बात को ध्यान में रखकर मप्र सरकार ने युवा नीति की आधार शिला रखी. विवेकानंद जी की कही बातो का इस युवा नीति में समावेश है. इन्हें कैसे आत्मनिर्भर बनाया जाए इस पर इस नीति में ध्यान दिया गया है. यह नीति अभी बाल्य अवस्था में है. जैसे जैसे यह युवा होगी वैसे वैसे इस नीति के परिणाम हमें देखने को मिलेंगे.
मध्यप्रदेश के युवाओ के लिए प्रदेश में ऐसा वातावरण तैयार करना जिससे उनकी सोच में सकारातमक आये, उनकी यह सकारात्मक उर्जा राज्य हित में उपयोगी हो. उनका समग्र विकास हो ( व्यक्तित्व,आर्थिक और शैक्षणिक). वे देश के आदर्श नागरिक बन सके. युवा और युवती उन्हें कहा जायेगा जिनकी आयु 18 से 35 वर्ष के मध्य हो.
उदेश्य:
1. प्रदेश में ऐसे वातावरण का निर्माण करना जिससे युवा अपनी योग्यता का निखार कर आधुनिक कौशल अर्जित कर सके और अपने आपको आर्थिक रूप से संपन्न बना सके. आज के युवा अपनी डिग्री के आधार पर नौकरी पाना चाहता है, प्रदेश सरकार चाहती है कि आज का युवा अपनी डिग्री के आधार पर आधुनिक कौशल का विशेषग्य हो जिसका लाभ युवाओ के साथ प्रदेश को भी मिल सके. इससे वे आर्थिक रूप से संपन्न तो बनेगे और इससे प्रदेश भी लाभान्वित होगा.
2. युवाओ में नेतृत्व गुणों को विकसित कर, राष्ट्र/समाज/प्रदेश के सकारात्मक विकास में सक्षम हो सके.
3. युवाओ की क्रिएटिव उर्जा को उत्प्रेरित करना और उन्हें साहसिक निर्णय लेने के योग्य बनाना, उनकी खेलकूद में रूचि पैदा कर उनमे प्रतिस्पर्धा के गुणों को विकसित करना.
4. युवतियों को उनके गुणों को निखारने का अवसर देना और उनकी क्षमता के अनुरूप वातावरण तैयार करना.
5. SC/ST और अन्य पिछड़े वर्गों , नि:शक्तजन एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं के आर्थिक, सामाजिक को सशक्त बनाने के लिये विशेष प्रयास।
कार्यक्षेत्र
1. सरकार स्कुल शिक्षा की नीति बनाएगी. सर्वशिक्षा अभियान को कक्षा 9 से 12 वी तक विस्तारित किया जायेगा. माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक के विषयों में विभिन्न प्रकार के आधुनिक हुनरो का शामिल किया जायेगा.
2. पाठ्यक्रमो को इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि माध्यमिक शिक्षा के बाद युवको में रोजगार और स्वरोजगार के लिए क्षमता में वृध्दि हो सके. विभिन्न कौशल जैसे बढ़ई, प्लम्बर, लुहारी, डी.टी.पी. प्रबंधन आदि तथा विभिन्न खेलकूद यथा क्रिकेट, योग, मलखम्ब, खो-खो, कबड्डी, हॉकी आदि में छात्र अपनी रुचि के अनुसार किसी एक विषय का विशेषग्य बन सके. कौशल के गुणों को युआओ में विकसित करने के लिए स्थानीय विषय विशेषज्ञों की सहायता ली जाएगी. 10-12 के अकादमिक योग्यता के साथ कौशल योग्यता का प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था की जायेगी.
3. उच्च गुणवता, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थाओ को प्रदेश में उनके स्कुल खोलने के लिए प्रेरित किया जायेगा.
4. प्रतिभावान बच्चो को प्रदेश और देश के ख्यातिनाम संस्थाओ में प्रवेश के लिए उनकी सहायता की जाएगी.
उच्च शिक्षा
1. उच्च शिक्षा को रोजगारन्मुखी बनाया जायेगा.सभी पाठ्य कर्मो का पुनर मूल्यांकन किया जाकर ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया जायेगा जो रोजगार पाने या खुद का रोजगार खोलने में मदद करे.
2. प्रदेश में उच्च गुणवता और ख्यातिनाम संस्थाये अपने संस्थान खोले इसके लिए वातावरण तैयार किया जायेगा.
3. उच्च शिक्षा में वैज्ञानिकता को बढ़ावा दिया जायेगा और आधुनिक कौशल के पाठ्यक्रमो को शामिल किया जायेगा.
4. शिक्षण संस्थाओ को स्वावलंबी बनाया जायेगा, सरकार और निजी क्षेत्र में चल रही संस्थाओ में काम करने के अवसर उपलब्ध कराये जायेंगे.
व्यवसायिक प्रशिक्षण
1. व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओ को आमंत्रित किया जायेगा.व्यवसायिक पाठ्यक्रमो में निरंतर बाजार की मांग के अनुसार परिवर्तित किया जायेगा. इन संस्थाओ को उद्योगों से जोड़ने का प्रयास भी किया जायेगा.
2. व्यवसायिक संस्थाओ को बाजार को मांग के अनुसार युवाओ को तैयार करने के इन्हें सक्षम बनाया जायेगा.
रोजगार प्रशिक्षण एवं उद्यमिता
1 रोजगार के लिए प्रदेश के युवाओ तैयार कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करना इस नीति का मुख्य उदेश्य है. रोजगारन्मुखी प्रशिक्षण नीति 2007 को प्रभावी तरीके से लागू किया जायेगा.
3. रोजगारन्मुखी कार्यक्रमों को लागू करने के लिए उच्च ख्यातिनाम संस्थाओ अपनी संस्थाये प्रदेश में चालू करने के लिए माहौल निर्माण किया जायेगा.
4. प्रतिभावान छात्र धन के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे इसका प्रबंध किया जायेगा.
स्वास्थ
युवको को स्वास्थ के प्रति जागरूक किया जायेगा, और कैसे अपने शरीर को स्वस्थ रखा जाये इसके लिए उन्हें प्रेरित किया जायेगा. युवक युवतियों को उनके अध्ययन काल में ही साफ सफाई रखने के प्रेरणा दी जायेगी. इसके लिए जनजागरण अभियान भी चलाया जायेगा. इनके मानसिक स्वास्थ पर ध्यान दिया जायेगा. इनके लिए नियमित पोष्टिक आहार की व्यवस्था की जाएगी. शारीरिक बनावट और मानसिक बदलाव के बारे में इन्हें बताने के लिए इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा. किशोर अवस्था में होने वाले परिवर्तन के लिए इनकी काउंसलिंग की व्यवस्था की जायेगी. वाओं में नशा, यौन रोगों, एचआईवी एड्स के फैलाव को रोकने के लिये आवश्यक शिक्षण/काउंसिलिंग और मार्गदर्शन की व्यवस्था की जायेगी। आवश्यकतानुसार किशोर मार्गदर्शन कक्ष बड़े अस्पतालों में खोले जायेंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में भी सम्यक व्यवस्था की जायेगी.नशे के दुश्परिनामो, एड्स आदि से भी अवगत कराया जायेगा. जनसँख्या वृध्दि से उन्हें परिचित कराकर इसके लिए इनका उपयोग किया जायेगा. पर्यावरण नीति के लिए इनमे मोह जगाया जायेगा.
खेल
1 युवकों के हित में खेल नीति, 2005 का प्रभावी किया जायेगा.
2 युवाओं के लिये खेल प्रशिक्षण एवं खेल अधोसंरचना का विस्तार किया जायेगा.
3 बदलते परिवेश में राज्य शासन खेल को न केवल स्वस्थ मनोरंजन व शारीरिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानता है, बल्कि इसमें रोजगार की संभावनाएं भी देखता है.प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को शासकीय नौकरियों में उनकी योग्यता एवं उपलब्धता के अनुरूप रोजगार की व्यवस्था की जायेगी
4 खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा चलाये जा रहे शत-प्रतिशत रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को संभाग स्तरीय जिलों में विस्तारित किया जायेगा।
योग
योग नीति के अनुरूप युवको और युवतियों को योग विधा से परिचित कराया जायेगा, और स्कुलो में इन्हें पढ़ाने की व्यवस्था की जायेगी.

नेतृत्व विकास.
युवको में नेतृत्व विकास की विभिन्न जीवन शैली से इन्हें परिचित कराया जायेगा, आकस्मिक परिस्थिति में कैसी अपनी क्षमता को विकसित करे सिखाया जायेगा. युवकों में जन-जागरण और नेतृत्व का विकास के लिये युवा समूह, युवा क्लब, हेल्थ क्लब, सांस्कृतिक क्लब, खेलकूद क्लब जैसे क्लबो की गतिविधियों को सुचारू संचालन के लिए इन संस्थाओ को प्रोत्साहित किया जायेगा और उन्हें सहायता प्रदान की जायेगी। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रो और समुदायों की प्रचलित संस्कृति, रीति, रिवाज और ज्ञान की जानकारी के लिए , शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में उनका समावेश किया जायेगा. ग्राम स्तर , राज्य स्तर तथा बड़े नगरों में मोहल्लों आदि में गायन, नाटक, नृत्य, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जायेंगी
शासन क्या करेगा
1. युवको और युवतियों से संबंधित कार्यक्रमों के लिये एक राज्य स्तरीय एजेंसी गठित की जायेगी। युवाओं से सबंध रखने वाली विभिन्न जानकारियां, आयटी का उपयोग करते हुए प्रदेश में स्थापित होने वाली सूचना गुमटियों के माध्यम से इन युवकों और युवतियों तक पहुंचाई जायेगी। युवा नीति को लागू करने के लिये निजी क्षेत्र, स्वयंसेवी संगठनों एवं जन-भागीदारी की प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया जायेगा। युवा नीति के प्रावधानों को लागू करने वाले शहरी और ग्रामीण निकायों और संस्थाओं को पुरूस्कार देने की योजना को मूर्त रूप दिया जायेगा. स्थानीय निकायों को जन-भागीदारी के आधार पर युवा नीति लागू करने के लिये अनुदान दिया जायेगा.
2. युवा नीति लागू करने के लिये राज्य स्तर पर एक कोष का निर्माण किया जायेगा. युवा नीति लागू करते समय ग्रामीण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, स्कूलों के बाहर छात्र, किशोर अवस्था के छात्र विशेषकर नि:शक्त कन्याओं एवं युवकों, नशा प्रभावित, अनाथों, बेघर एवं विभिन्न दुर्घटनाओं के शिकार युवाओं और युवतियों को प्राथमिकता दी जायेगी.
युवा नीति को लागु करने की व्यवस्था
1.प्रदेश के प्रत्येक विभाग और निकायों में विशेषकर सामाजिक क्षेत्र के विभाग में युवाओं के लिये विशिष्ट रूप से बजट दिया जायेगा.
2. युवा नीति को लागू करने के लिये नीतिगत निर्णय हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समिति गठित की जायेगी, जिसमें संबंधित विभागों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी एवं युवा प्रतिनिधि सदस्य होंगे.
3. युवा नीति लागू करने के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक सशक्त समिति का गठन किया जायेगा, जो नियमित रूप से युवा नीति के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिये समीक्षा कर उन्हें कार्यान्वित करायेगी.
4. महत्वपूर्ण विभागों में युवा प्रकोष्ठ का गठन किया जायेगा, जो युवा नीति को लागू करने एवं संबंधित मामलों के कार्यान्वयन के लिये नियमित रूप से अनुश्रवण करेगा.
5. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति दो-दो वर्ष के अंतराल में युवा नीति की समीक्षा कर उसमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन भी सुझायेगी एवं उपलब्धियों का आंकलन करेगी.
6. प्रदेश में युवा नीति लागू है, युवा इंजिनियरो को निर्माण कार्यो में भाग लेने के लिए विशेष छुट का प्रावधान किया जा रहा है. प्रदेश सरकार युवक और युवतियों के सर्वांगींण विकास के कृत संकल्पित है.

अंत में एक साईट से ली गयी शायरी
हर दर्द की एक पहचान होती है
ख़ुशी चंद लम्हों की मेहमान होती है
वही बदलते हैं रुख हवाओं का
जिनके इरादों में जान होती है
युवा नीति की मोटी मोटी जानकारी मप्र के जन संपर्क की साईट से ली गयी है

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